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उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दिन में तीन से चार बार कà¥à¤› चमà¥à¤®à¤š घर में बना गनà¥à¤¨à¥‡ का जूस दे. गनà¥à¤¨à¥‡ के जूस से लिवर मजबूत होता है. नवजात शिशॠको पीलिया होने पर दूध में कà¥à¤› बूंदे वà¥à¤¹à¥€à¤Ÿà¤—à¥à¤°à¤¾à¤¸ के जूस की मिलाकर दे सकते हैं. वà¥à¤¹à¥€à¤Ÿà¤—à¥à¤°à¤¾à¤¸ लिवर से अतिरिकà¥à¤¤ बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को बाहर निकलने में मदद करता है.
नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पीलिया होने पर कà¥à¤¯à¤¾ करें
नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पीलिया होना à¤à¤• आम बात है और यह पीलिया तब होता है जब उनके शरीर में बिलीरूबिन की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ जाती है। नवजात बचà¥à¤šà¥‡ का शरीर पूरी तरह से विकसित ना होने के कारण उसका लीवर रकà¥à¤¤ से बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को बाहर नहीं निकाल पाता जिसके कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पीलिया यानी जौंडिस की शिकायत हो सकती है। पीलिया (Pilia) की शिकायत होने पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का शरीर, चेहरा और आंखों का रंग पीला पड़ने लगता है। यह बीमारी तब जानलेवा बन जाती है जब इसका इलाज समय पर ना किया जाà¤à¥¤ à¤à¤¸à¤¾ होने पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को केरनीकेटरस नामक बीमारी हो सकती है जिससे बचà¥à¤šà¥‡ के दिमाग को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है। यह बीमारी लगà¤à¤— 70% शिशà¥à¤“ं में हो जाती है।
फोटोथैरेपी इसका à¤à¤• उपाय है जिससे पीलिया होने पर शिशॠका इलाज किया जाता है लेकिन इसके अलावा कà¥à¤› घरेलू उपचार (Home Remedies for Jaundice) à¤à¥€ है जिससे आप अपने बचà¥à¤šà¥‡ का घर पर ही उपचार कर सकती हैं।
नवजात शिशॠको पीलिया कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है (Reason for Jaundice in Newborn Babies)
नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पीलिया जनà¥â€à¤® के समय से ही हो सकता है। यह रकà¥â€à¤¤ में विशेष पिगà¥â€à¤®à¥‡à¤‚ट यानि बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ (Bilirubin) की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ने के कारण होता है। बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ शरीर में लाल रकà¥â€à¤¤ कोशिकाओं के समापà¥à¤¤ होने पर बनता है। नवजात शिशॠका शरीर अधिक बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ का सामना नहीं कर पाता है। अत: बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ नवजात शिशॠके शरीर में à¤à¤•तà¥à¤° हो जाता है, जिसके परिणामसà¥â€à¤µà¤°à¥‚प बचà¥à¤šà¥‡ को पीलिया हो जाता है। हालांकि यह पीलिया सामानà¥à¤¯ होता है लेकिन अगर दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से अधिक पीलिया हो तो यह बेहद गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया का सà¥à¤¤à¤° (Avg. Level of Bilirubin in newborn Kids in Hindi)
जनम के समय बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के शरीर में तनाव होता है जिस कारण बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक होना सामानà¥à¤¯ होता है। जनà¥à¤® के à¤à¤• से दो दिन के बाद à¤à¥€ बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ का लेवल 5 (Bilirubin Level :5 mg/Decimal) से अधिक हो तो बचà¥à¤šà¥‡ को पीलिया माना जाता है।
नवजात बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया के लकà¥à¤·à¤£ (Symptoms of Jaundice in Small Kids in Hindi)
जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया (Jaundice) होता है उनके चेहरे, शरीर और आंखों का रंग पीला पड़ना à¤à¤• आम बात है परंतॠइसके अलावा à¤à¥€ कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ लकà¥à¤·à¤£ है जो शिशॠमें पीलिया होने पर दिखाई देते हैं
, जैसे कि:
शिशॠके पूरे शरीर का पीला पड़ जाना
शिशॠका चिड़चिड़ा होना और बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रोना
शिशॠके नाखून, हथेलियों और मसूड़ों का à¤à¥€ पीला पड़ना
शिशॠके पेशाब और मल à¤à¥€ गहरा पीले रंग का आना
नवजात शिशॠको पीलिया होने पर घरेलू उपचार (Home Remedies for Jaundice in Hindi)
अगर शिशॠके जनà¥à¤® होते ही पीलिया (Bachchon ki Pilia) हो जाठतो अकà¥à¤¸à¤° डॉकà¥à¤Ÿà¤° शिशॠको असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में ही रख लेते हैं परंतॠआप इस समसà¥à¤¯à¤¾ का इलाज कà¥à¤› घरेलू उपचार अपना कर à¤à¥€ कर सकती हैं, जो कि इस पà¥à¤°à¤•ार है:
1. सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ (Breastfeeding) जब शिशॠके शरीर में बिलीरूबिन की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ने से पीलिया की शिकायत होती है तो उसके शरीर में बिलीरूबिन की मातà¥à¤°à¤¾ को कम करने के लिठà¤à¤• मां को उसे बार-बार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाते रहना चाहिठताकि वह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने से उसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पेशाब आà¤à¥¤ शिशॠको पीलिया की शिकायत होने पर उसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नींद आती है इसलिठà¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आप उसे हर 2 या 3 घंटे के बाद बार-बार सनबरà¥à¤¨ करवाà¤à¤‚। अगर आपके शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने में कोई परेशानी हो रही है या वह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ नहीं कर रहा है तो आप अपना दूध निकाल शिशॠको चमà¥à¤®à¤š से à¤à¥€ दूध पिला सकती हैं।
. सूरज की रोशनी (Sun rays) पीलिया होने पर सूरज की रोशनी à¤à¤• सबसे आम और पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक उपचार है। पीलिया होने पर उसे जड़ से मिटाने के लिठशिशॠको à¤à¤• या दो घंटे बाहर धूप में लिटाये। उस समय उसके शरीर पर सिरà¥à¤« डायपर ही होना चाहिà¤à¥¤ शिशॠके शरीर पर सूरज की किरने पड़ने पर शरीर में बिलीरूबिन की मातà¥à¤°à¤¾ कम होती है। धूप दिखाने के लिठआप शिशॠको सीधा धूप में ना रखें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ में टैन हो सकता है। इसके लिठआप शिशॠको शीशे की खिड़की के बगल में रखें। खिड़की के शीशे से धूप हो छन कर बचà¥à¤šà¥‡ पर सीधा पढ़ने दे।
इसे अधिकांश बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पीलिया के लकà¥à¤·à¤£ बहà¥à¤¤ हलà¥à¤•े होते हैं और यह लगà¤à¤— 2 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ या अपने आप ही चले जाते हैं। अगर यह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ और सूरज की रोशनी से à¤à¥€ ठीक नहीं होते तो आप तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि नहीं तो यह à¤à¤• जानलेवा बीमारी बन सकती है। इसे à¤à¥€ पà¥à¥‡à¤‚ः आंखों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ आप à¤à¤• माठके रूप में अनà¥à¤¯ माताओं से शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ या तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से अपने अनà¥à¤à¤µ बांटना चाहती हैं? अगर हाà¤, तो माताओं के संयà¥à¤•à¥à¤¤ संगठन का हिसà¥à¤¸à¤¾ बने। यहाठकà¥à¤²à¤¿à¤• करें और हम आपसे संपरà¥à¤• करेंगे।
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